नई दिल्ली में आयोजित 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि रूस भारत को निरंतर और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति देने के लिए प्रतिबद्ध है। पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद भारत द्वारा रियायती रूसी कच्चे तेल की बढ़ती खरीद को देखते हुए यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
“भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग पूरी करेगा रूस” — पुतिन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुतिन ने कहा कि रूस भारत की तेज़ी से बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों के लिए भरोसेमंद साझेदार बना रहेगा। उन्होंने भारतीय नेतृत्व और जनता द्वारा दिए गए गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार भी व्यक्त किया। पुतिन ने बताया कि भारत-रूस के बीच 96% वाणिज्यिक भुगतान राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहे हैं, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती देता है।
व्यापार 64 अरब डॉलर, लक्ष्य 100 अरब
रूसी राष्ट्रपति के अनुसार बीते वर्ष दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार में 12% वृद्धि दर्ज की गई और यह आंकड़ा करीब 64 अरब डॉलर तक पहुंचा। उन्होंने भरोसा जताया कि निकट भविष्य में यह व्यापार 100 अरब डॉलर का स्तर पार कर सकता है।
पुतिन ने यह भी कहा कि भारत और यूरेशियन आर्थिक संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता वाणिज्यिक संबंधों को नई गति देगा, जिस पर काम पहले से जारी है।
परमाणु संयंत्र और ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर पर तेज़ी
पुतिन ने जानकारी दी कि रूस भारत के सबसे बड़े परमाणु संयंत्र परियोजना पर तेज़ी से काम कर रहा है और छह में से तीन रिएक्टर पहले ही राष्ट्रीय ग्रिड से जुड़ चुके हैं। इसके अलावा दोनों देश मिलकर उत्तर-दक्षिण परिवहन मार्ग सहित नए अंतर्राष्ट्रीय लॉजिस्टिक नेटवर्क विकसित कर रहे हैं, जिससे रूस और भारत के बीच व्यापार और तेज़ होगा।
ब्रिक्स और रक्षा सहयोग पर भी जोर
- रूस और भारत ब्रिक्स, एससीओ सहित कई बहुपक्षीय मंचों पर एक-दूसरे के करीबी साझेदार हैं।
- पुतिन ने कहा कि भारत अगले वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता करेगा और रूस पूरी सहायता प्रदान करेगा।
- उन्होंने यह भी दोहराया कि रूस दशकों से भारतीय सेना को आधुनिक हथियार और तकनीक उपलब्ध कराता रहा है।
- पुतिन ने विश्वास जताया कि यह यात्रा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करेगी।
इसे भी पढ़े- पवन खेड़ा की कोर्ट में होगी पेशी, ट्रांजिट रिमांड पर असम ले जाएगी पुलिस


