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तो क्या अब अधिकृत और अनाधिकृत बैरियर पर ट्रक चालक बिना चढ़ावा निकलेंगे

खबर संसार हल्द्वानी । तो क्या अब अधिकृत और अनाधिकृत बैरियर पर ट्रक चालक बिना चढ़ावा के निकल जायेंगे। जी हा कल डीआईजी नीलेश आनंद भरणे के साथ हुई देवभूमि ट्रक ओनर्स यूनियन सेट मोर्चा की वार्ता के बाद कुछ मामलों में सहमति बनी है।

तो क्या अब अधिकृत और अनाधिकृत बैरियर पर ट्रक चालक बिना चढ़ावा निकलेंगे

बताते चलें कि देवभूमि ट्रक ओनर्स यूनियन संयुक्त मोर्चा के बैनर तले ट्रांसपोर्ट कार्यवाही की हड़ताल सोमवार को भी जारी रही। यूनियन ने पुलिस और सीपीयू पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए ट्रांसपोर्टरों ने रानी बाग तिहराहे पर जमकर नारेबाजी की। डीआईजी ने वार्ता के लिए यूनियन के पदाधिकारियों अधिकारियों को वार्ता हेतु बुलाया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार एक ट्रक चालक को हल्द्वानी की मंडी से रानी बाग तक पहुंचने में 9 अधिकृत और अनाधिकृत बैरियर पर अलग एंट्री देनी पड़ती है जिसके लिए 200 से लेकर 500 रुपया शुल्क निर्धारित है। ट्रांसपोर्ट कारोबारी को कहना है कि अगर किसी पुलिस अधिकारी का सामान और सरकारी सामान पहाड़ को ले जाए तो किसी तरह की चालानी कार्रवाई नहीं होती लेकिन जब अन्य सामान लेकर जाते चालान किया जाता है। ट्रांसपोर्टरों ने बताया कि हल्द्वानी से अल्मोड़ा तक की दूरी 100 किलोमीटर है जिसमें 25 बैरियर पढ़ते हैं इसी तरह हल्द्वानी से बागेश्वर जाने की दूरी 175 किलोमीटर है जिसमें 35 बैरियर है इसी तरह हल्द्वानी से पिथौरागढ़ करीब 220 किलोमीटर की दूरी है जिसमे 45 बैरियर पढ़ते हैं।

 

पुलिस के पास तमाम मामलों की विवेचना पड़ी हुई है। कई केसों की फाइलें सबूतों और गवाहों के अभाव में बंद हो चुकी हैं, लेकिन कुमाऊं में मित्र पुलिस का पूरा फोकस ट्रकों के चालान पर ही रहता है। इस बात का अहसास प्रदर्शनकारी ट्रांसपोर्ट कारोबारियों से बातचीत में हुआ , जिन्होंने कहा पुलिस की दबंगई का आलम यह है कि हल्द्वानी मंडी से सामान लेकर चलने वाले ट्रक चालक को रानीबाग पहुंचने तक 9 अधिकृत और अनधिकृत बैरियरों पर अलग-अलग एंट्री देना पड़ती है। इसके लिए 200 से 500 रुपये शुल्क निर्धारित है। उसके बाद रानीबाग से नैनीताल जिले की सीमा तक 4 बैरियरों पर इस तरह का चढ़ावा देना पड़ता है। हल्द्वानी से अल्मोड़ा तक की बात करें तो 25 बैरियरों पर रकम दी जाती है। ऐसे में 100 किलोमीटर तक 10 हजार रुपये तक तो पुलिस के चढ़ावे में ही चले जाते हैं। कारोबारियों ने बताया कि अलग अलग रूटों के हिसाब से यह रकम अलग-अलग है। इसके अलावा चालान अलग से भुगतान पड़ता है।

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