नई दिल्ली, 15 सितंबर 2025 : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी और 50 प्रतिशत टैरिफ के बावजूद भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया। बल्कि अगस्त में भारत ने रिकॉर्ड स्तर पर रूसी तेल आयात कर अमेरिका को कड़ा संदेश दिया। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने अगस्त में रूस से 2.9 बिलियन यूरो (करीब साढ़े तीन अरब डॉलर) का तेल खरीदा। यह चीन के 3.1 बिलियन यूरो (3.64 अरब डॉलर) के बेहद करीब है।
रूस से भारत और चीन की तेल खरीद
रिपोर्ट्स के अनुसार, जुलाई में भारत का तेल आयात 2.7 बिलियन यूरो था, जो अगस्त में बढ़कर 2.9 बिलियन यूरो पहुंच गया। वहीं, चीन का आयात जुलाई में 4.1 बिलियन यूरो से घटकर अगस्त में 3.1 बिलियन यूरो रह गया। चीन ने रूस से खरीदारी में थोड़ी कमी की, लेकिन भारत ने आयात बढ़ाकर सबको चौंका दिया।
अमेरिकी दबाव का भारत का जवाब
अमेरिका लगातार भारत पर दबाव डाल रहा है कि वह रूस से तेल न खरीदे, लेकिन भारत ने इसे नजरअंदाज किया। 50% टैरिफ के बावजूद भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से कच्चा तेल खरीदा। विशेषज्ञों के अनुसार, यूराल क्रूड ब्रेंट की तुलना में 5-6 डॉलर प्रति बैरल सस्ता है, जिससे भारतीय उद्योग को बड़ी बचत हो रही है।
यूक्रेन ड्रोन हमलों के बीच भी सप्लाई
अगस्त 2025 में यूक्रेन ने रूस की तेल रिफाइनरियों पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला किया। इससे रूस की कुल रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 20% यानी 1.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन उत्पादन प्रभावित हुआ। सिज़रान रिफाइनरी, क्रास्नोडार संयंत्र और उस्त-लुगा टर्मिनल सहित कई अहम बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुँचा। इसके बावजूद रूस ने निर्यात में 2,00,000 बैरल प्रतिदिन की वृद्धि की।
भारत ने संकट को अवसर में बदला
रूसी घरेलू ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने के बावजूद भारत ने स्थिति का फायदा उठाया। सस्ते दामों पर कच्चे तेल की उपलब्धता भारतीय रिफाइनरियों के लिए लाभकारी साबित हुई। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह रणनीति आने वाले महीनों में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत कर सकती है।
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