खबर संसार बरेली । प्रदोष पूजन सावन के महीने में कराया जाता है बरेली चूंकि नाथ नगरी है लिहाजा यह हर दूसरे तीसरे घर प्रदोष पूजन किया जाता है। बरेली में सात नाथ है इसलिए इसको प्राचीन काल से ही नाथ नगरी के रूप में पहचान मिली हुई है। धोपेश्वर नाथ पशुपति नाथ,अलखनाथ,त्रिवटीनाथ ,वनखंडी नाथ इत्यादि।
घर में समृद्धि के लिए पूजन किया जाता है इस पूजा के दौरान शिवलिंग स्थापित किया जाता है इसकी मिट्टी खास होती है जिसमे साप की बॉम्बिंग चिटियो की बॉम्बिंग की मिट्टी का मिश्रण के साथ पिंडोल मिट्टी का उपयोग किया जाता है। शिवलिंग में अंग वस्त्र के रूप में पवित्र धागे से शिवलिंग के चारो और बंधन सा दिया जाता है । जिसको शिव वस्त्र के रूप में नाम दिया गया है।दूध दही शहद गुलाब के फूल बेलपत्री धतूरा भी अभिषेक के रूप में चढ़ाया जाता है। सिंघी द्वारा जल और दूध चढ़ाया जाता है जब तक जाप चलता है।
शिव के बारे में भस्मासुर के प्रकरण के साथ साथ रावण और उसकी सोने की लंका का दहन कथा जुड़ी हुई है।
सावन के समय भगवान विश्वकर्मा द्वारा तैयार सोने का विशाल भव्य भवन के ग्रह प्रवेश हेतु रावण को बुलाया जाता है क्योंकि रावण सबसे बड़ा पंडित माना जाता था। इसलिए रावण को सोने के भवन का पूजन के लिए बुलाया और रावण ने दक्षिणा में भवन ही मांग लिया ।जिसे हम सोने की लंका के रूप में जानते है। जिसे बाद में भस्म होना पड़ता है।



