खबर संसार हल्द्वानी। शौक ने ही ताजिंदगी तरोताजा,हरफनमौला रखा,उसी शौक को पूरा करने के दौरान हादसा। जी हा हम बात कर रहे है अपने हल्द्वानी शहर के इसी मिजाज के व्यक्तित्व डॉक्टर महेश कुमार की। जो हर समय अपने मरीजों के साथ साथ सामाजिक एक्टिविटीज में सक्रिय थे। मुझे याद है डॉक्टर महेश कुमार मेरे साथ लंबी लंबी राजनीति की बाते भी किया करते थे। बड़े बड़े अधिकारियों से लेकर सामान्य अधिकारियों के कार्यों पर वो बैवाकी से बोला करते थे। अभी हाल में ही वो मुझे होटल अमरदीप में इसी माह भाजपा कार्यसमिति बैठक में मिले जहा डॉक्टर्स का एक प्रतिनिधिमंडल सीएम पुष्कर धामी से मिला था।तब क्या पता था उनको आखिरी बार देखना है।
शौक ने ही ताजिंदगी तरोताजा,हरफनमौला रखा,उसी शौक को पूरा करने के दौरान हादसा
64 वर्षीय डॉ. महेश कुमार को नेचर से लगाव अक्सर उन्हे अपनी ओर खींचता था।है। जिसके चलते वह अपनी प्रैक्टिस के बीच तरोताजा होने के लिए साल में 2 बार कभी एक बार जाया करते थे। घुमक्कड़ी मैं उनका दिल लगा करता था। मशहूर प्रतिष्ठित सर्जन महेश कुमार की यादें जी भी उनके संपर्क में आया होंगा उसे शायद हमेशा याद रहेंगी। उनका अस्पताल संजीवनी का स्टाफ भी अपने आका का कोई अता पता ना चलने पर। मायूस है। रेस्क्यू टीम लगातार लगी हुई है लेकिन अभी तक उनके बारे में कोई अपडेट नहीं पता चल रही। पानी जरूरत से ज्यादा आने के कारण मटमैला सा है।
इधर डॉक्टर महेश कुमार के दोस्त डॉ. जेएस भंडारी ने खबर संसार से भावनात्मक बात करते हुए कहा कि डॉ. महेश मूल रूप से बड़ौत के रहने वाले हैं। लेकिन उन्हें पहाड़ों से बेहद लगाव है। उन्होंने कुमाऊं और गढ़वाल के करीब-करीब सभी ट्रैकों पर ट्रैकिंग की है। उनकी दोस्ती भी डॉक्टरों से ज्यादा ट्रैकरों से है। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम के पास शेखवास का ट्रैक भी काफी लंबे समय से उनके जहन में था। इसी को पूरा करने के लिए वह पूरे प्लान बना कर गए थे।

