क्या बाघ की संख्या अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाकर बड़ाई जा सकती है! जी बिलकुल नहीं जिस तरह से लगातार बाघ की संख्या गिर रही है आने वाले कुछ सालो में म्यूजियम में ही देखने को मिलेंगे बाघ। क्योंकि जंगल की जमीन पर मनुष्य का हस्तक्षेप बढ़ता जा रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस दुनिया भर में मनाया जाता है ताकि हम सभी बाघ संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ा सकें। इस दिन का उद्देश्य एक विश्वव्यापी प्रणाली का निर्माण करना है जो बाघों और उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा के लिए समर्पित होगी।
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भारत दुनिया के आधे से अधिक जंगली बाघों का घर है यहां लगभग 2,967 बाघ रहते हैं। बाघ संरक्षण पर जागरूकता पैदा करने और वन्यजीवों और लोगों के बीच एक मजबूत बंधन विकसित करने के लिए समारोहों का आयोजन किया जाता है।
हर साल 29 जुलाई को इंटरनेशनल टाइगर डे मनाया जाता है. इस समय एक रिपोर्ट से पता चला कि सभी बाघों में से 97% गायब हो गए है, वैश्विक परिदृश्य में सिर्फ 3,900 बाघ ही जीवित हैं. तभी से बाघों को बचाने और इनकी संख्या बढ़ाने के लिए लोगों को जागरुक किया गया. 2022 में बाघों की संख्या साढ़े चार हजार के आसपास पहुंच गई है। एक सदी पहले, दुनियाभर भर में लगभग 100,000 बाघ (Tiger) जंगलों पर राज करते थे. लेकिन 21वीं सदी आते-आते केवल 13 देशों में बाघों की संख्या चार हजार से भी कम हो गई।
29 जुलाई को ही अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस क्यों मनाया जाता है?
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस 2010 में रूस में 13 टाइगर रेंज देशों द्वारा सेंट पीटर्सबर्ग घोषणा पर हस्ताक्षर के दौरान अस्तित्व में आया था। इन टाइगर रेंज वाले देशों की सरकारों ने 2022 तक प्राकृतिक आवासों के संरक्षण और बाघों की संख्या को दोगुना करने के लिए संरक्षण को प्रोत्साहित करने का संकल्प लिया था।
बाघों के संरक्षण के लिए कब क्या हुआ?
- 1973 भारत ने बाघों की आबादी को पुनर्जीवित करने के लिए प्रोजेक्ट टाइगर लॉन्च किया।
- 13 टाइगर रेंज वाले देश 2022 तक जंगली बाघों की संख्या को दोगुना करने के लिए टीएक्स2 के लिए प्रतिबद्ध हैं।
- 2022 टाइगर का वर्ष: डब्ल्यूडब्ल्यूएफ का लक्ष्य 2022 में जंगल में रहने वाले बाघों की संख्या को दोगुना करना है।
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