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क्या योग बदल सकता है ब्रेन हेल्थ? नई स्टडी ने दिए चौंकाने वाले संकेत

हर साल 21 जून को दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। भारत के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र ने दिसंबर 2014 में इसे आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय दिवस का दर्जा दिया था। इस साल योग दिवस की थीम “स्वस्थ उम्र बढ़ने के लिए योग” रखी गई है। खास बात यह है कि अब इस थीम को वैज्ञानिक रिसर्च का भी समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है।

अल्जाइमर मरीजों पर योग को लेकर AIIMS की रिसर्च

दिल्ली स्थित एम्स में हुई एक नई स्टडी में यह पाया गया है कि नियमित योग अभ्यास अल्जाइमर रोग के शुरुआती चरण के मरीजों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। यह रिसर्च ‘अल्जाइमर डिजीज जर्नल’ में प्रकाशित हुई है। अध्ययन को एम्स के एनाटॉमी और न्यूरोलॉजी विभाग ने संयुक्त रूप से पूरा किया।

इस रिसर्च में हल्के अल्जाइमर से जूझ रहे मरीजों को शामिल किया गया। प्रतिभागियों ने 12 सप्ताह तक रोजाना 60 मिनट के निगरानी वाले योग सत्रों में हिस्सा लिया। रिसर्च की शुरुआत और अंत में मरीजों की मानसिक क्षमता, डिप्रेशन के लक्षण और आंतों में मौजूद बैक्टीरिया की संरचना का मूल्यांकन किया गया।

योग से मानसिक स्वास्थ्य में दिखा सुधार

स्टडी के नतीजों में कई सकारात्मक बदलाव सामने आए। मॉन्ट्रियल कॉग्निटिव असेसमेंट के आधार पर मरीजों की कॉग्निटिव क्षमता में सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही पीएचक्यू-9 स्केल के जरिए मापे गए डिप्रेशन के लक्षणों में भी कमी देखी गई।

रिसर्च में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव आंतों के माइक्रोबायोम में पाया गया। योग अभ्यास के बाद फैसालिबैक्टेरियम प्राउसनिट्जी, रोज़बुरिया इंटेस्टिनालिस, बिफिडोबैक्टीरियम और अक्करमैन्सिया जैसे लाभकारी बैक्टीरिया की संख्या बढ़ी। ये बैक्टीरिया शरीर में सूजन कम करने और ब्रेन हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। वहीं कॉलिन्सेला एरोफैसिएन्स और क्लेब्सिएला जैसे सूजन बढ़ाने वाले बैक्टीरिया की संख्या में कमी दर्ज की गई।

गट-ब्रेन एक्सिस की भूमिका पर एक्सपर्ट्स का फोकस

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के पीछे गट-ब्रेन एक्सिस की अहम भूमिका हो सकती है। हाल के वर्षों में कई रिसर्च में यह सामने आया है कि आंतों में मौजूद बैक्टीरिया न सिर्फ इम्यून सिस्टम को प्रभावित करते हैं, बल्कि मस्तिष्क के कामकाज पर भी असर डालते हैं।

एम्स के एनाटॉमी विभाग की प्रोफेसर और इस स्टडी की प्रमुख रिसर्चर डॉ. रीमा दादा के अनुसार, योग जैसी लाइफस्टाइल आधारित गतिविधियां आंतों में स्वस्थ माइक्रोबायोम विकसित करने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि लाभकारी बैक्टीरिया में वृद्धि और हानिकारक माइक्रोबायोम में कमी ब्रेन हेल्थ को बेहतर बनाने वाली जैविक प्रक्रियाओं से जुड़ी हो सकती है।

क्या योग अल्जाइमर का इलाज है?

एम्स दिल्ली के न्यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. मंजरी त्रिपाठी ने साफ किया कि योग को अल्जाइमर रोग का इलाज नहीं कहा जा सकता। हालांकि शुरुआती चरण के मरीजों और हल्की कॉग्निटिव कमजोरी से जूझ रहे लोगों के लिए यह एक सहायक चिकित्सा पद्धति के रूप में उपयोगी हो सकता है।

उन्होंने बताया कि रिसर्च में मानसिक क्षमता, मूड और आंतों के माइक्रोबियल कम्युनिटी में सकारात्मक बदलाव देखे गए हैं। हालांकि वैज्ञानिकों ने यह भी माना कि अध्ययन का सैंपल साइज छोटा था, इसलिए इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।


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