अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़े भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। बुधवार को बाजार में जबरदस्त बिकवाली हुई, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट ने निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये की कमी ला दी।
अमेरिका-ईरान तनाव का भारतीय शेयर बाजार पर असर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसका प्रभाव भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। बुधवार दोपहर करीब 2 बजे तक बीएसई सेंसेक्स 1,800 अंक यानी 2.05 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,570 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं, एनएसई निफ्टी 493 अंक यानी 2.03 प्रतिशत टूटकर 23,907 पर पहुंच गया।
निवेशकों की संपत्ति में 8.56 लाख करोड़ रुपये की गिरावट
बाजार में आई तेज गिरावट का सबसे बड़ा असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर पड़ा। मंगलवार को निवेशकों की कुल संपत्ति 480.20 लाख करोड़ रुपये थी, जो बुधवार को घटकर 471.64 लाख करोड़ रुपये रह गई। यानी केवल एक कारोबारी दिन में निवेशकों को लगभग 8.56 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
इन दिग्गज शेयरों में रही सबसे ज्यादा बिकवाली
दोपहर के कारोबार के दौरान सेंसेक्स में शामिल कई बड़ी कंपनियों के शेयर दबाव में रहे। इंटरग्लोब एविएशन, एचयूएल, मारुति सुजुकी, आईटीसी, एशियन पेंट्स, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL), अल्ट्राटेक सीमेंट और एक्सिस बैंक के शेयरों में 5 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। ये सभी शेयर लाल निशान में कारोबार करते रहे।
इंट्राडे में सेंसेक्स 1,900 अंक तक लुढ़का
बुधवार को दोपहर करीब ढाई बजे तक बाजार में बिकवाली और तेज हो गई। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1,900 अंकों तक टूट गया। अंततः यह 1,878.26 अंक यानी 2.40 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,302.46 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी-50 भी 24,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। इस बड़ी गिरावट के चलते निवेशकों को लाखों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
कच्चे तेल की कीमतों में भी आया उछाल
बीती रात अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया। दोनों देशों के बीच पूरी रात हमलों की खबरें सामने आईं। इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम का समझौता समाप्त हो चुका है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला और इसकी कीमत लगभग 6 प्रतिशत बढ़कर 78 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी दुनिया की नजर
फिलहाल वैश्विक बाजार की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर बनी हुई है। यदि होर्मुज मार्ग अवरुद्ध होता है, तो भारत समेत कई देशों में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ने की आशंका है। हाल ही में लोगों को महंगाई से कुछ राहत मिली थी, लेकिन मौजूदा हालात फिर से चिंता बढ़ाने वाले साबित हो सकते हैं।
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