भारत ने अपनी अग्नि प्राइम मिसाइल का सफल परीक्षण रेल-आधारित मोबाइल लॉन्चर से कर एक नई रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया है। 24 दिसंबर 2025 को ओडिशा के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से दागी गई यह मिसाइल भारत की रक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव मानी जा रही है। रेल नेटवर्क से लॉन्च होने के कारण इसे ‘घोस्ट ट्रेन’ क्षमता कहा जा रहा है, क्योंकि यह देशभर में तेजी से मूव कर सकती है और सैटेलाइट से ट्रैक करना बेहद मुश्किल होता है।
9,000 किमी प्रति घंटा की रफ्तार, 2,000 किमी तक मार
अग्नि प्राइम एक मीडियम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) है जिसकी मारक क्षमता लगभग 2,000 किलोमीटर तक है। यह सॉलिड-प्रोपेलेंट और कैनिस्टर-लॉन्च्ड तकनीक पर आधारित है, जिससे इसे बिना फ्यूलिंग के बेहद कम समय में दागा जा सकता है। इसकी रफ्तार 8,500 से 9,000 किलोमीटर प्रति घंटा तक बताई जा रही है। परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम यह मिसाइल भारत की न्यूक्लियर डिटरेंस नीति को और मजबूत बनाती है।
देहू और मिस्सा: रणनीतिक तैनाती
सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र के देहू और असम के मिस्सा में इसकी तैनाती की तैयारी की गई है। देहू से पाकिस्तान की दूरी कम है, जबकि मिस्सा से चीन के रणनीतिक क्षेत्रों पर नजर रखी जा सकती है। यहां रेल साइडिंग, रिट्रैक्टेबल शेल्टर और विशेष लॉन्च एरिया तैयार किए गए हैं।
चीन और पाकिस्तान क्यों चिंतित?
रेल-आधारित मोबिलिटी इसे पारंपरिक मोबाइल लॉन्चर से अलग बनाती है। अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी मिसाइलें पहले हमले से बचाव की क्षमता बढ़ाती हैं। चीन और पाकिस्तान के लिए इसकी लोकेशन और मूवमेंट ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
दुनिया में रूस, अमेरिका, चीन और उत्तर कोरिया ने भी रेल-आधारित मिसाइलों पर काम किया है, लेकिन सक्रिय और प्रभावी तैनाती सीमित देशों के पास ही है।
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