खबर संसार, नई दिल्ली: घोड़े पर सवार होकर आ रही माता रानी, Chaitra Navratri 2022 इस बार हैं खास…, चैत्र नवरात्रि अर्थात मां दुर्गा की आराधना का दिन। क्योंकि इसी दिन में हिन्दुओं के नये संवत्सर की शुरूआत भी होती है। हिन्दू धर्म में चैत्र नवरात्रि को पवित्र त्योहारों में से एक माना गया है। मां दुर्गा को सुख-समृद्धि के साथ धन की देवी माना जाता है, तो ऐसे माता के 9 विभिन्न स्वरूपों की पूजा पूजा-अर्चना विधि-विधान के साथ करनी चाहिए। माना जाता है कि नवरात्रि में माता की पूजा-अर्चना करने से देवी दुर्गा की अपने भक्तों पर विशेष कृपा बनी रहती है।
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कब से शुरू है Chaitra Navratri 2022
यहां बताते चलें कि वर्षभर में 4 बार नवरात्रि आती हैं, लंकिन चैत्र नवरात्रि व शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है। इस वर्ष Chaitra Navratri 2022 शनिवार से चैत्र नवरात्रि 2 अप्रैल 2022 से शुरू होकर 11 अप्रैल 2022 को समाप्त होगी। ऐसे में इस साल चैत्री नवरात्रि नौ दिनों तक मनाई जाएगी। इसी दिन से हिन्दुओं का नव वर्ष 1979 भी शुरू हो जाएगा। चैत्र नवरात्री का पर्व हिंदू धर्म में बहुत खास होता है जो हर वर्ष शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होते हैं।
क्या है कलश स्थापना का सही समय
चैत्र नवरात्री के दौरान पूजा स्थल पर दुर्गा पूजा से पहले कलश स्थापना करनी चाहिए। फिर सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित करने के साथ गणेश जी और मां दुर्गा की आरती करते है और 9 दिनों के व्रतों की शुरुआत करते हैं। बता दें चैत्र नवरात्री के दौरान कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त शनिवार, 2 अप्रैल, 2022 को सुबह 6 बजकर 22 मिनट से शुरू होगा जो 8 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। बता दें कलश स्थापना की कुल अवधि 02 घण्टे 09 मिनट्स की रहेगी।
इस वर्ष मां घोड़े पर सवार होकर आएंगी
चैत्र नवरात्रि में मां इस वर्ष 2 अप्रैल शनिवार को घोड़े पर सवार होकर आएंगी। अगर नवरात्र सोमवार या रविवार से शुरू होते तो मां हाथी पर सवार होकर आती। वहीं, शनिवार या मंगलवार से नवरात्र शुरू होने पर मां का वाहन घोड़ा और गुरुवार या शुक्रवार से शुरू होने पर डोली होती है। नवरात्र बुधवार से आरंभ हो तो मां नाव पर सवार होकर आती है।
किस वाहन का क्या असर
देवी भागवत पुराण में कहा गया है कि जब मां हाथी पर सवार होकर आती हैं तो पानी ज्यादा बरसता है। वहीं, घोड़े पर सवार होकर आती हैं तो युद्ध की आशंका बनी रहती है। नौका पर सवार होकर आने का संकेत शुभ और फलदायी होता है। वहीं, अगर मां डोली में बैठकर आती हैं तो महामारी, संहार की संभावना रहती है। साल 2022 के चैत्र नवरात्री में माता रानी घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं। आप जानते ही हैं कि इस समय रूस और यूक्रेन के बीच भयंकर युद्ध हो रहा है, जिसके कारण कई देशों को तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रस्थान के वाहन हैं अलग
मां के आगमन ही नहीं बल्कि प्रस्थान का वाहन भी अलग-अलग होता है। इस बार नवरात्री सोमवार के दिन खत्म हो रहे हैं, जिसका मतलब है कि देवी भैंसे पर सवार होकर गमन करेंगे। देवी भागवत पुराण में कहा गया है कि रविवार या सोमवार को देवी भैंसे पर सवार होकर धरती से प्रस्थान करती हैं, जिसका मतलब है कि देश में रोग और शोक बढ़ेगा। मां शनिवार या मंगलवार को मुर्गे पर सवार होकर जाती हैं, जिससे दुख और कष्ट की वृद्धि होती है। बुधवार या शुक्रवार को देवी हाथी की सवारी पर जाती है, जिससे बारिश ज्यादा होने की आशंका रहती है। वहीं, अगर मां गुरुवार को मनुष्य की सवारी से गमन करती है, जो सुख और शांति की वृद्धि का संकेत होता है।


