Rahul Gandhi के मोदी सरनेम वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता पूर्णेश मोदी और गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी। बता दें की मोदी उपनाम वाले लोगों की मानहानि मामले में राहुल को 2 साल की सज़ा मिली है। इसके चलते उनकी संसद सदस्यता रद्द हो गई है। यह सदस्यता तभी बहाल हो सकती है, जब उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगे।
जाने क्या है मामला?
बता दें की 2019 में Rahul Gandhi ने पीएम नरेंद्र मोदी, IPL के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी और भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी की तुलना करते हुए विवादित बयान दिया था। बीजेपी नेता पूर्णेश मोदी ने इसके खिलाफ गुजरात के सूरत की कोर्ट में आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उन्होंने मोदी नाम वाले सभी लोगों को चोर बताया है। इस साल 25 मार्च को सूरत के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) ने माना कि एक अनुभवी नेता और सांसद होने के नाते राहुल को एक पूरे वर्ग को अपमानित करने वाला बयान नहीं देना चाहिए था। CJM ने राहुल को IPC की धारा 500 के तहत 2 साल की सज़ा दी।
सेशंस कोर्ट से मिली ज़मानत
सीजेएम ने राहुल को अपील करने के लिए 30 दिन का समय देते हुए उनकी सज़ा स्थगित कर दी। इस वजह से राहुल को जेल नहीं जाना पड़ा। बाद में सूरत की सेशंस कोर्ट ने राहुल की अपील पर सुनवाई करते हुए उन्हें नियमित ज़मानत दे दी। उनकी अपील अभी भी सेशंस कोर्ट में लंबित है। इसके बाद भी राहुल के हाई कोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने की वजह है उनकी संसद सदस्यता।
संसद सदस्यता बचाना चाहते हैं Rahul Gandhi
दरअसल, जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8(1) के तहत किसी मामले में 2 साल या उससे अधिक की सज़ा पाने वाला व्यक्ति सांसद या विधायक पद के अयोग्य हो जाता है। इतना ही नहीं, सज़ायाफ्ता व्यक्ति सज़ा पूरी होने के 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता। इस चलते राहुल न सिर्फ संसद से बाहर हो गए हैं, बल्कि अगले कई सालों तक चुनाव लड़ने के लिए भी अयोग्य हो गए हैं। यह स्थिति 2 ही तरीकों से बदल सकती है-
1- उनकी सज़ा या तो खत्म हो जाए या 2 साल से कम हो जाए
2- अपील के लंबित रहने तक उनकी दोषसिद्धि (conviction) पर रोक लग जाए
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