पाकिस्तान फिर सक्रिय कर रहा आतंकी शिविर, भारत ने बढ़ाई चौकसी जी, हां भारत द्वारा 7 मई को किए गए ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकी संगठनों के नौ ठिकानों को ध्वस्त किया गया था। इसमें जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन के ठिकाने शामिल थे। बावजूद इसके, पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई फिर से आतंक की फैक्ट्री खड़ी करने में जुट गई है।
आतंकी शिविरों का दोबारा निर्माण शुरू
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान पीओके के इलाकों में आतंकी लॉन्चपैड और प्रशिक्षण शिविरों का पुनर्निर्माण कर रहा है। लूनी, पुटवाल, ताइपु पोस्ट, फॉरवर्ड कहुटा जैसे क्षेत्रों में हाई-टेक शिविर बनाए जा रहे हैं। इन शिविरों को ड्रोन और सैटेलाइट से बचाने के लिए आधुनिक उपकरणों से लैस किया जा रहा है।
आईएसआई की नई रणनीति: छोटे-छोटे शिविर
आईएसआई कथित तौर पर जम्मू सेक्टर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर चार लॉन्चपैड का पुनर्विकास कर रही है। पाकिस्तानी जासूसी एजेंसी एक ही स्थान पर आतंकवादियों के जमावड़े को कम करने के लिए बड़े शिविरों को छोटे शिविरों में विभाजित करने की नई रणनीति अपना रही है, जिससे हमले की स्थिति में संभावित नुकसान को कम किया जा सके। प्रत्येक मिनी-कैंप की अपनी परिधि सुरक्षा होगी, जिसकी निगरानी विशेष रूप से प्रशिक्षित पाकिस्तानी सेना के जवान करेंगे। सूत्रों ने बताया कि ये गार्ड थर्मल सेंसर, कम आवृत्ति वाले रडार सिस्टम और एंटी-ड्रोन तकनीक से लैस होंगे।
हाई लेवल मीटिंग
भारतीय खुफिया एजेंसियों ने बहावलपुर में हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बारे में संकेत देने वाले संचार को भी पकड़ा है। इस बैठक में कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) के वरिष्ठ कमांडरों के साथ-साथ आईएसआई के अधिकारी भी शामिल थे। टीआरएफ 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमले के पीछे था, जिसमें जम्मू-कश्मीर में 26 लोग मारे गए थे।
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