.खबर संसार हल्द्वानी । यू ओ यू के विशेष शिक्षा विभाग द्वारा मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित “मनोवैज्ञानिक मुद्दे और मनोवैज्ञानिकों की भूमिका” विषय पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का समापन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर ओमप्रकाश सिंह नेगी एवं हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा विश्वविद्यालय देहरादून के कुलपति एवं उत्तराखंड राज्य की कोविड-19 टास्क फोर्स के अध्यक्ष प्रोफेसर हेम चंद्र पांडे द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. हेम चन्द्र पांडे, कुलपति हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा विश्वविद्यालय द्वारा अपने उद्बोधन में कहा गया कि कोविड-19 के काल में लोगों को जागरूक करने में मनोवैज्ञानिकों एवं चिकित्सकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, समाज के लोगों को उन पर अपना विश्वास बनाए रखना होगा। वर्तमान समय में चिकित्सिय मानव संसाधन की उचित संख्या उपलब्ध है और कोविड के समय में हम सबको संयम बनाए रखना है।
समापन सत्र की अध्यक्षता कर रहे उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ओ पी एस नेगी द्वारा अपने उद्बोधन में सामान्य लोगों को जागरूक करने हेतु मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रमाण पत्र कार्यक्रम संचालन किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मुक्त विश्वविद्यालय और चिकित्सा विश्वविद्यालय के साथ मिलकर मानसिक स्वास्थ्य विषय पर पाठ्यक्रम प्रारंभ करने पर सुझाव दिया, साथ ही कोविड-19 के समय के विषय में समय में मनोवैज्ञानिक को की भूमिका की सराहना भी की और आशा व्यक्त की कि विश्वविद्यालय समय-समय पर इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा।
शिक्षा विद्या शाखा के निदेशक प्रोफ़ेसर एच पी शुक्ला ने अपने उद्बोधन में कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी को अपनी शुभकामनाएं दी। सहायक प्राध्यापिका डॉ भावना धोनी द्वारा सभी आमंत्रित अतिथियों, प्रतिभागियों, वक्तागणों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के विशेष शिक्षा विभाग द्वारा चल रहे मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित मनोवैज्ञानिक मुद्दे और मनोवैज्ञानिकों की भूमिका विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का समापन उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर ओमप्रकाश सिंह नेगी एवं हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा विश्वविद्यालय देहरादून के कुलपतिएवं उत्तराखंड राज्य की कोविड-19 टास्क फोर्स के अध्यक्ष प्रोफेसर हेम चंद्र पांडे द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
समापन सत्र पर संयोजक डॉ सिद्धार्थ पोखरियाल द्वारा सभी आमंत्रित अतिथियों प्रतिभागियों और विषय विशेषज्ञों का स्वागत व अभिनंदन किया गया। इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार की रिपोर्ट डॉ सिद्धार्थ पोखरियाल द्वारा सभी के समक्ष रखी गई। समापन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. हेम चन्द्र पांडे, कुलपति हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा विश्वविद्यालय द्वारा अपने उद्बोधन में कहा गया कि सामान्य लोगों को भी मनोवैज्ञानिकों की सेवा का लाभ मिला है।कोविड-19 के काल में लोगों को जागरूक करने में मनोवैज्ञानिकों एवं चिकित्सकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है समाज के लोगों को उन पर अपना विश्वास बनाए रखना होगा। वर्तमान समय में चिकित्सिय मानव संसाधन की उचित संख्या उपलब्ध है और कोविड के समय में हम सबको संयम बनाए रखना है व्यक्ति अपनी इच्छाशक्ति के बल पर ही हर समस्या का समाधान करने में सक्षम है।समापन सत्र की अध्यक्षता कर रहे उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ओ पी एस नेगी द्वारा अपने उद्बोधन में सामान्य लोगों को जागरूक करने हेतु मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रमाण पत्र कार्यक्रम संचालन किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मुक्त विश्वविद्यालय और चिकित्सा विश्वविद्यालय के साथ मिलकर मानसिक स्वास्थ्य विषय पर पाठ्यक्रम प्रारंभ करने पर अपनी सुझाव दिया साथ ही कोविड-19 के समय के विषय में समय में मनोवैज्ञानिक को की भूमिका की सराहना भी की और आशा व्यक्त की कि विश्वविद्यालय समय-समय पर इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा। साथ ही दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में लोगों को जागरूक करने में मुक्त विश्वविद्यालय एक अहम भूमिका निभाएगा। शिक्षा विद्या शाखा के निदेशक प्रोफ़ेसर एच पी शुक्ला ने अपने उद्बोधन में कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी को अपनी शुभकामनाएं दी। सहायक प्राध्यापिका डॉ भावना धोनी द्वारा सभी आमंत्रित अतिथियों, प्रतिभागियों, वक्तागणों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन वेबिनार के सयोंजक डॉ0 सिद्धार्थ पोखरियाल ने किया।वेबिनार में डॉ देवकी सरोला, डॉ कल्पना लखेड़ा, डॉ सुमन लटवाल समेत इग्नू से प्रोफेसर अमिताभ मिश्रा, एमिटी यूनिवर्सिटी से डॉ राम शंकर सक्सैना, गुरु घासीदास केंद्रिय विश्वविद्यालय से डॉ शिव कुमार एसजीटी यूनिवर्सिटी, गुड़गांव से डॉ सुनीता पोरुष इत्यादि उपस्थित रहे।ना, गुरु घासीदास केंद्रिय विश्वविद्यालय से डॉ शिव कुमार एसजीटी यूनिवर्सिटी, गुड़गांव से डॉ सुनीता पोरुष इत्यादि उपस्थित रहे।



