आगरा, खबर संसार। EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों) को लेकर जिस तरह से राजनीतिक दल सवाल खड़ा करते हैं उसपर विराम लगाने के लिए चुनाव आयोग ने इस बार (VVPAT) वीवीपैट के इस्तेमाल का फैसला लिया है।
पहली बार ऐसा होगा जब उत्तर प्रदेश में सभी पोलिंग बूथ पर वीवीपैट मशीनें (VVPAT) लगाई जाएंगी। चुनाव आयोग के अधिकारी ने बताया कि इस कदम के जरिए वोटर इस बात को सुनिश्चित कर सकेंगे कि उनका वोट उनकी पसंद के उम्मीदवार को ही गया है।
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पांचों राज्यों में होगा इसका प्रयोग
चुनाव आोग के निर्देशानुसार वीवीपैट (VVPAT) को सभी ईवीएम मशीनों को गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में जोड़ा जाएगा। वीवीपैट ईवीएम (VVPAT) पर वोट डालने के बाद एक पेपर प्रिंट करता है, जिसे खुद वोटर चेक कर सकता है कि अगर उसे किसी भी तरह का संदेह है।
इसके बाद इस प्रिंटआउट को बॉक्स में डाल दिया जाता है, जिसका बाद में किसी भी विवाद की स्थिति में इस्तेमाल किया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि थर्ड जेनरेशन एम-3 ईवीएम मशीनों का उत्तर प्रदेश के चुनाव में इस्तेमाल किया जाएगा। यह मशीन अपने आप काम करना बंद कर देगी अगर कोई इसके साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश करता है। रविवार ईवीएम में पेपर डालने का काम पूरा कर लिया गया है।
10 मार्च को आएंगे चुनाव के नतीजे
उत्तर प्रदेश में पहले चरण में 10 फरवरी को 58 विधानसभा सीटों पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 11 जिलों में मतदान होना है। जिसके नतीजे 10 मार्च को सामने आएंगे। गौर करने वाली बात है कि 8 अक्टूबर 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान कहा था कि चुनाव आयोग वीवीपैट का आगामी चुनावों में इस्तेमाल करे, जिससे कि चुनावों में पारदर्शिता को सुनिश्चित किया जा सके।
पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, पुड्डुचेरी में वीवीपैट मशीनों का इस्तेमाल किया गया था। पश्चिम बंगाल में 1492, तमिलनाडु में 1183, केरल में 728, असम में 647, पुड्डुचेरी में 156 वीवीपैट मशीनों का इसेतमाल किया गया था।
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