नई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2025 – संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत को स्थायी सदस्यता देने की मांग ने एक बार फिर वैश्विक चर्चा को गति दी है। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी और सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत को देखते हुए कई देश और विशेषज्ञ इसके पक्ष में खड़े हैं। सिंगापुर के पूर्व राजनयिक किशोर महबूबानी ने हाल ही में सुझाव दिया कि ब्रिटेन को अपनी स्थायी सीट भारत को सौंप देनी चाहिए।
भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत
दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर चुका भारत अब ब्रिटेन को आर्थिक ताकत में पीछे छोड़ चुका है। महबूबानी ने सिंगापुर में एक भू-राजनीतिक चर्चा के दौरान कहा, “2000 में ब्रिटिश अर्थव्यवस्था भारत से चार गुना बड़ी थी, लेकिन आज भारत ब्रिटेन से आगे है। 2050 तक भारत ब्रिटेन से चार गुना बड़ा होगा।” उन्होंने वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया।
रूस और भूटान का समर्थन
हाल के यूएन सत्र में रूस और भूटान ने भारत को स्थायी सीट देने की वकालत की। रूस ने लंबे समय से भारत का समर्थन किया है, जबकि भूटान ने इस बार खुलकर भारत के पक्ष में आवाज उठाई। भारत के प्रधानमंत्री भी कई बार कह चुके हैं कि भारत को वीटो शक्ति के साथ यूएनएससी में स्थान मिलना चाहिए, जैसा कि अमेरिका, रूस, चीन और ब्रिटेन के पास है।
ब्रिटेन की भूमिका पर सवाल
महबूबानी ने तर्क दिया कि ब्रिटेन, जिसने भारत पर 200 साल तक शासन किया, अब वैश्विक मंच पर अपनी ऐतिहासिक भूमिका के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा, “ब्रिटिशों को उदारता दिखानी चाहिए और भारत को अपनी सीट दे देनी चाहिए।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर 100 से अधिक लोगों के डेलीगेशन के साथ भारत आए थे, ताकि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को आगे बढ़ाया जा सके।
वैश्विक संरचनात्मक बदलाव की जरूरत
महबूबानी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “1980 में यूरोपीय संघ का जीडीपी चीन से 10 गुना बड़ा था, लेकिन आज दोनों बराबर हैं। 2050 तक यूरोपीय संघ चीन से आधा रह जाएगा।” भारत और चीन की बढ़ती ताकत को देखते हुए, उन्होंने यूएनएससी में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारत का दावा मजबूत
1.4 अरब की आबादी और मजबूत लोकतंत्र के साथ भारत का दावा यूएन में स्थायी सीट के लिए मजबूत है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को यह स्थान देने से वैश्विक शांति और स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।
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