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इस गाय के बछिया को देखकर गांव में मचा हड़कंप, वजह जानकर चौंक जाएंगे

शहर के गोरापड़ाव इलाके से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक गाय ने ऐसी बछिया को जन्म दिया है, जिसके दो मुंह, तीन आंखें और तीन कान हैं। इस दुर्लभ घटना की खबर फैलते ही आसपास के लोगों की भीड़ मौके पर जुटने लगी। लोग इस अनोखी बछिया को देखने के लिए उत्सुक नजर आए।

प्रसव के दौरान आई कई परेशानियां

जानकारी के मुताबिक गोरापड़ाव के डी-क्लास क्षेत्र निवासी महेश चंद्र बचकेती और हंसी बचकेती के घर बुधवार शाम करीब पांच बजे गाय ने इस बछिया को जन्म दिया। पशुपालकों ने बताया कि प्रसव सामान्य नहीं था और बछिया को बाहर निकालने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

मौके पर पहुंचे पशु चिकित्सक ने काफी मेहनत के बाद सुरक्षित प्रसव कराया। बताया जा रहा है कि बछिया की शारीरिक संरचना सामान्य से अलग होने के कारण यह प्रक्रिया बेहद चुनौतीपूर्ण रही।

ऐसा क्यों होता है

दो मुंह, अतिरिक्त आंख या शरीर के अन्य असामान्य अंगों के साथ किसी बछड़े या जानवर का जन्म होना बेहद दुर्लभ जैविक स्थिति मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या आमतौर पर गर्भ में भ्रूण के विकास के दौरान गड़बड़ी की वजह से होती है।

भ्रूण के विकास में रुकावट बनती है कारण

जब गर्भ में भ्रूण विकसित हो रहा होता है, उस दौरान कोशिकाएं शरीर के अलग-अलग अंग बनाती हैं। कई बार यह प्रक्रिया पूरी तरह सामान्य नहीं रहती और शरीर के कुछ हिस्से अलग तरीके से विकसित होने लगते हैं। इसी कारण दो मुंह, अतिरिक्त आंख या अतिरिक्त अंग जैसी स्थिति बन सकती है।

जुड़वां भ्रूण का अधूरा विकास भी वजह

पशु चिकित्सकों के मुताबिक कई मामलों में यह “अधूरा जुड़वां विकास” (Incomplete Twinning) का परिणाम होता है। यानी गर्भ में दो भ्रूण बनने की प्रक्रिया शुरू होती है, लेकिन वे पूरी तरह अलग नहीं हो पाते। इससे एक ही शरीर में दो सिर या अतिरिक्त अंग विकसित हो सकते हैं।

ऐसे मामलों में जीवित रहना मुश्किल

दो सिर या अतिरिक्त अंगों वाले जानवरों के लिए सामान्य जीवन जीना काफी कठिन होता है। शरीर का संतुलन, भोजन करना और चलना-फिरना प्रभावित हो सकता है। कई मामलों में ऐसे जानवर ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह पाते, लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में वे सामान्य देखभाल के साथ जीवित भी रहते हैं।

वैज्ञानिक दृष्टि से दुर्लभ मामला

विशेषज्ञ इसे किसी चमत्कार या अलौकिक घटना की बजाय एक दुर्लभ जैविक स्थिति मानते हैं। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इस तरह के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, लेकिन इनकी संख्या बेहद कम होती है।


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