मुंबई। हिंदी फिल्म जगत के सबसे चहेते और सबसे लंबे समय तक सक्रिय रहे सुपरस्टार धर्मेंद्र का आज दोपहर मुंबई स्थित उनके जुहू बंगले में निधन हो गया। 89 वर्षीय अभिनेता पिछले कई दिनों से गंभीर रूप से बीमार थे और सांस लेने में तकलीफ के कारण इस महीने की शुरुआत में ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती भी कराए गए थे। चिकित्सकों के अनुसार, दोपहर करीब 1 बजकर 10 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निजी चिकित्सक डॉ. नितिन गोखले ने बताया कि लंबे समय से चल रही फेफड़ों की बीमारी और उससे जुड़ी जटिलताओं के कारण उनका निधन हुआ।
धर्मेंद्र का पार्थिव शरीर शाम 4 बजे उनके जुहू स्थित आवास ‘धर्म-वीरा’ पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। शाम 6 बजे से विले पार्ले के पवनहंस श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा है। अंतिम यात्रा में उनके पुत्र सनी देओल और बॉबी देओल कंधा दे रहे हैं। दूसरी पत्नी और बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ हेमा मालिनी, बेटियां ईशा देओल और अहाना देओल, दामाद भरत तख्तानी, पोते करण देओल और राजवीर देओल सहित पूरा परिवार मौजूद है।
बॉलीवुड का सैलाब उमड़ा
शाम होते-होते पवनहंस श्मशान घाट पर बॉलीवुड की भीड़ ऐसी थी मानो कोई प्रीमियर चल रहा हो। अमिताभ बच्चन, सलमान खान, शाहरुख खान, आमिर खान, अक्षय कुमार, अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ, संजय दत्त, अनुपम खेर, सुभाष घई, डेविड धवन, रमेश सिप्पी, करण जौहर, एकता कपूर, रणवीर सिंह, विक्की कौशल, कियारा आडवाणी, आलिया भट्ट, रणबीर कपूर, करीना कपूर, सैफ अली खान, अनुष्का शर्मा, वरुण धवन, कृति सैनन समेत सैकड़ों कलाकार और तकनीशियन पहुंचे। कई पुराने सह-कलाकार जैसे आशा पारेख, हेलेन, वहीदा रहमान, मुमताज, जितेंद्र भी आंसुओं को रोक नहीं पाए।
छह दशक का सफर: गांव के लड़के से ‘गढ़म धर्म’ तक
8 दिसंबर 1935 को पंजाब के लुधियाना जिले के छोटे से गांव नसराली में जाट सिख परिवार में जन्मे धर्म सिंह देओल ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वे हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सितारे बनेंगे। पिता केवल सिंह देओल स्कूल मास्टर थे। 1958 में ‘फिल्मफेयर’ के टैलेंट हंट में जीतने के बाद 1960 में राजेंद्र सिंह बेदी की फिल्म ‘दिल भी तेरा, हम भी तेरे’ से उन्होंने परदे पर कदम रखा। शुरुआती आठ-दस फिल्में औसत रहीं, लेकिन 1966 में आई ‘फूल और पत्थर’ ने उन्हें रातोंरात सुपरस्टार बना दिया। यह हिंदी सिनेमा की पहली फिल्म थी जिसमें हीरो ने शर्टलेस दृश्य किया था – और धर्मेंद्र को ‘ही-मैन’ और ‘गढ़म धर्म’ का खिताब मिल गया।
इसके बाद ‘आया सावन झूम के’, ‘आये दिन बहार के’, ‘आंखें’, ‘शोले’, ‘चुपके चुपके’, ‘सीता और गीता’, ‘ड्रीम गर्ल’, ‘धर्म-वीर’, ‘यमला पगला दीवाना’ जैसी अनगिनत सुपरहिट फिल्में आईं। उन्होंने नूतन, माला सिन्हा, आशा पारेख, वैजयंतीमाला, सायरा बानो, रेखा, जया बच्चन, श्रीदेवी, जूही चावला से लेकर करीना कपूर और आलिया भट्ट तक – हर पीढ़ी की अभिनेत्रियों के साथ काम किया। 2023 में रणवीर सिंह और आलिया भट्ट के साथ ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ उनकी अंतिम बड़ी फिल्म साबित हुई।
सम्मान और विरासत
- 1997 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड
- 2012 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण
- 300 से अधिक फिल्में, 114 बार टॉप बिलिंग में नाम
- 2004-2009 तक राजस्थान के बीकानेर से भाजपा सांसद
- दो बार फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवॉर्ड (फूल और पत्थर, सत्यकाम)
निजी जीवन: दो शादियां, एक बड़ा परिवार
धर्मेंद्र की पहली शादी 1957 में प्रकाश कौर से हुई थी। उनके चार बच्चे – सनी, बॉबी, विजयता (विम्मी) और अजीता। 1980 में उन्होंने हेमा मालिनी से दूसरी शादी की (बिना पहली पत्नी से तलाक लिए, क्योंकि उन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया था)। हेमा से दो बेटियां – ईशा और अहाना। कुल मिलाकर उनके छह बच्चे, तीन दामाद, एक बहू और 13 नाती-पोते हैं।
नेताओं और दिग्गजों की श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, “धर्मेंद्र जी का जाना भारतीय सिनेमा के एक पूरे युग का अंत है। उनकी सादगी, उनकी गर्मजोशी, उनका जोश हमेशा याद रहेगा। शोक संतप्त परिवार को मेरी संवेदना। ओम शांति।”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “उन्होंने गांव-देहात के नायक को मुख्यधारा में लाकर करोड़ों लोगों को सपने दिए।”
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लिखा, “पंजाब का लाल, हिंदी सिनेमा का शहंशाह हमेशा अमर रहेगा।”
सोशल मीडिया पर शोक की लहर
#Dharmendra, #RIPHeMan, #Veeru जैसे हैशटैग दुनियाभर में ट्रेंड कर रहे हैं। प्रशंसक ‘शोले’ का डायलॉग “ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे” और “बसंती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना” लिख-लिखकर रो रहे हैं। एक प्रशंसक ने लिखा, “आज बसंती का कुत्ता भी रो रहा है।”
अंतिम शब्द
धर्मेंद्र हमेशा कहा करते थे, “मैं किसान का बेटा हूं, मिट्टी से आया हूं, मिट्टी में ही मिल जाऊंगा।” आज वह मिट्टी में मिल गए, लेकिन उनके दिए हुए संवाद, उनकी मुस्कान, उनकी आवाज और उनका जोश आने वाली कई पीढ़ियों तक गूंजता रहेगा। हिंदी सिनेमा के इस ‘ही-मैन’ को भावभीनी श्रद्धांजलि। ॐ शांति ॐ
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