जुलाई 2026 से चीनी के दाम करीब 10 फीसदी बढ़ चुके हैं और त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की आशंका है। ऐसे में सरकार अक्टूबर से शुरू होने वाले नए सीजन में एथेनॉल बनाने के लिए गन्ने के इस्तेमाल पर रोक लगाने पर विचार कर रही है। हालांकि, सरकार की ओर से अब तक कोई ऑफिशियल स्टेटमेंट नहीं आया है।
चीनी के दाम 10% क्यों बढ़े?
चीनी की कीमतों में उछाल की दो बड़ी वजहें हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश से अगले साल गन्ने का उत्पादन घटने की आशंका है। वहीं, अगस्त से नवंबर तक गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान मिठाइयों और कन्फेक्शनरी की खपत बढ़ने से चीनी की मांग तेज हो रही है।
महाराष्ट्र के कोल्हापुर में थोक चीनी की कीमत 4,716 रुपये प्रति 100 किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। बॉम्बे शुगर मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक जैन ने बताया कि त्योहारी सीजन से पहले मांग बढ़ी है, जबकि मिलें कीमतें और बढ़ने की उम्मीद में सप्लाई रोक रही हैं।
सरकार गन्ने से एथेनॉल का इस्तेमाल घटा सकती है
2026 में सितंबर तक चलने वाले सीजन में चीनी मिलों ने कुल उत्पादन का करीब 10 फीसदी यानी लगभग 30 लाख मीट्रिक टन चीनी एथेनॉल बनाने के लिए डायवर्ट की थी। अगले सीजन में इस डायवर्जन पर रोक लगने से घरेलू बाजार में इतनी ही अतिरिक्त चीनी मिल सकती है। इससे कम बारिश के कारण संभावित उत्पादन घाटे की भरपाई और चीनी आयात की जरूरत टल सकती है।
क्या E20 पेट्रोल बंद होगा?
नहीं। सरकार ने E20 या E10 पेट्रोल पर वापस जाने की कोई योजना नहीं होने की बात साफ की है। E20 कार्यक्रम जारी रहेगा। गन्ने से एथेनॉल कम बनने पर मक्का और चावल का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। E20 में गन्ने का रस या चीनी सीधे नहीं मिलाई जाती। फ्यूल-ग्रेड इथेनॉल गन्ने के रस, B-हेवी/C-हेवी मोलासेस, टूटे हुए चावल और मक्का से फर्मेंटेशन और डिस्टिलेशन के जरिए बनाया जाता है।
मक्का-चावल से बना एथेनॉल ज्यादा हानिकारक?
नहीं। इंजन पर असर कच्चे माल से नहीं, बल्कि एथेनॉल की गुणवत्ता और शुद्धता से होता है। गन्ना, मक्का या चावल से बना फ्यूल-ग्रेड एथेनॉल एक ही रासायनिक यौगिक (C₂H₅OH) होता है। परीक्षणों में 40,000 किलोमीटर तक पैसेंजर व्हीकल्स और 20,000 किलोमीटर तक दोपहिया वाहनों पर E20 का ड्राइवेबिलिटी या फ्यूल एफिशिएंसी पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पाया गया।
क्या सरकार E20 वापस ले सकती है?
नहीं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक E20 या E10 पर वापस जाने का कोई प्लान नहीं है। देशभर में 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर अलग-अलग ब्लेंड्स की सप्लाई चेन बनाए रखना मुश्किल और महंगा होगा। सरकार के मुताबिक 2023 से पहले बनी गाड़ियां भी E20 पेट्रोल पर चल सकती हैं। E15+ पेट्रोल साढ़े तीन साल से ज्यादा, जबकि E19-E20 पेट्रोल ढाई साल से ज्यादा समय से चल रहा है।
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