जैसे-जैसे दिवाली करीब आ रही है, भारत के बाजार रंग-बिरंगी रोशनी और रौनक से भर गए हैं। इस बार लोग पटाखों से होने वाले प्रदूषण को लेकर अधिक जागरूक हैं। यही वजह है कि पारंपरिक पटाखों की जगह ग्रीन पटाखों (Green Crackers) की मांग तेजी से बढ़ रही है।
ग्रीन पटाखों के प्रकार – तीन नए पर्यावरण अनुकूल विकल्प
ग्रीन पटाखे तीन मुख्य श्रेणियों में आते हैं –
सेफ वाटर रिलीजर (Safe Water Releaser): यह जलवाष्प छोड़ता है, जिससे हवा में मौजूद धूल के कण फंस जाते हैं।
सेफ थर्माइट क्रैकर (Safe Thermite Cracker): इसमें सल्फर और पोटेशियम नाइट्रेट नहीं होता, जिससे हानिकारक गैसों का उत्सर्जन घटता है।
सेफ मिनिमल एल्युमिनियम (Safe Minimal Aluminium): इसमें एल्युमिनियम और मैग्नीशियम की मात्रा कम होती है, जिससे धुआं और शोर दोनों घटते हैं।
इन पटाखों को CSIR-NEERI ने विकसित किया है, ताकि पारंपरिक पटाखों की तुलना में 30% तक प्रदूषण कम हो सके।
असली ग्रीन पटाखों की पहचान कैसे करें
असली ग्रीन पटाखों पर एक विशेष QR कोड होता है। इसे स्कैन करने पर निर्माता का नाम, लाइसेंस नंबर और प्रमाणन की जानकारी मिलती है। यदि कोड काम नहीं करता या गलत जानकारी दिखाता है, तो समझ लें कि पटाखा नकली है।
इसके अलावा, CSIR-NEERI का लोगो और PESO (Petroleum & Explosives Safety Organisation) का प्रमाणन असली ग्रीन पटाखों पर अवश्य अंकित होता है। केवल PESO द्वारा लाइसेंस प्राप्त निर्माता ही ऐसे पटाखे बना और बेच सकते हैं।
नकली ग्रीन पटाखों से सावधान रहें
बाजार में कई नकली निर्माता हरे रंग का लोगो या पारदर्शी पैकेजिंग दिखाकर ग्राहकों को भ्रमित करते हैं। असली ग्रीन पटाखा खरीदने से पहले QR कोड और प्रमाणन लेबल जरूर जांचें।
ध्वनि और प्रदूषण में बड़ा अंतर
जहां पारंपरिक पटाखों की आवाज़ 160 डेसिबल तक होती है, वहीं ग्रीन पटाखे 110 से 125 डेसिबल तक सीमित रहते हैं। इससे न केवल वायु प्रदूषण कम होता है, बल्कि ध्वनि प्रदूषण पर भी नियंत्रण रहता है। इस दिवाली अगर आप पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों की सुरक्षा चाहते हैं, तो ग्रीन पटाखों को प्राथमिकता दें। जागरूक उपभोक्ता बनें और असली प्रमाणित पटाखे ही खरीदें।
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