राज्यसभा में बोलते हुए डॉ. नरेश बंसल ने कहा कि भारत में अपशिष्ट प्रबंधन एक गंभीर समस्या बन चुका है और इस पर तुरंत ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्रों में कचरे के पहाड़ खड़े हो रहे हैं, जिससे प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ रहे हैं।
डॉ. बंसल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत कर देश को स्वच्छता की दिशा में आगे बढ़ाया, लेकिन अब चुनौती कचरे के निस्तारण की है। उन्होंने जोर दिया कि जो स्थानीय निकायों में कचरे के ढेर लगे हैं, उनके समाधान के लिए वैज्ञानिक और प्रभावी तरीकों की आवश्यकता है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ई-कचरा जनरेटर
आंकड़ों का जिक्र करते हुए डॉ. बंसल ने बताया कि भारत में ई-कचरे का उत्पादन लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ गया है। हर साल करीब 110 मिलियन मीट्रिक टन नगरपालिका ठोस अपशिष्ट उत्पन्न होता है। इस मामले में भारत अब अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ई-कचरा जनरेटर बन गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बन जाएगा।
समाधान: कचरे का पृथक्करण और विकेंद्रीकृत प्रसंस्करण
डॉ. बंसल ने सुझाव दिया कि कचरे के निस्तारण के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना होगा। बायोडिग्रेडेबल कचरे को स्रोत पर ही अलग करने और संसाधित करने की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कचरे का संग्रहण और परिवहन भले हो रहा हो, लेकिन पृथक्करण और रीसाइक्लिंग नहीं हो रहा है।
इसके लिए मौके पर ही कचरे के पुनर्चक्रण और प्रसंस्करण की व्यवस्था करनी होगी और पूरी प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत करना होगा ताकि स्थानीय निकाय इस काम में सशक्त हो सकें। अंत में, उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर तत्काल सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
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