अगर आप भी रखते है घुमने का शौक तो जरूर घूमें मिर्जा गालिब की हवेली। दिल्ली में स्थित इस हवेली में घूमने का अपना एक अलग ही आनंद है। उर्दू और फारसी भाषा के महान शायर गालिब की शायरी को लोग आज भी सुनना व बोलना पसंद करते हैं।
Mirza Ghalib के मुरीद लोगों के लिए यह हवेली किसी खजाने से कम नहीं है। अगर आप साहित्य में रूचि रखते हैं तो ऐसे में आपको एक बार इस हवेली को जरूर देखना चाहिए। मिर्जा गालिब की यह हवेली पुरानी दिल्ली में स्थित है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको मिर्जा गालिब की हवेली के बारे में विस्तारपूर्वक बता रहे हैं-
बेहद खास है मिर्जा गालिब की हवेली
पुरानी दिल्ली में स्थित Mirza Ghalib की हवेली कई मायनों में बेहद खास है और इसलिए हर साहित्य प्रेमी को इसे एक बार जरूर देखना चाहिए। दरअसल, दिल्ली में ही उन्होंने Mirza Ghalib के नाम से शायरी करना शुरू किया था। वैसे उनका जन्म काला महल नाम की एक जगह पर हुआ था और उनका वास्तविक नाम असदुल्ला बेग खां था। लेकिन दिल्ली आने के बाद उन्होंने मिर्जा गालिब के नाम से शायरी करनी शुरू कर दी। इतना ही नहीं, गालिब ने अपने जीवन के आखिरी साल इसी हवेली में बिताए थे।
कभी नहीं खरीदा घर
Mirza Ghalib की हवेली को अब एक राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जा चुका है। लेकिन बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि मिर्जा गालिब ने कभी भी इस घर को खरीदा नहीं था, बल्कि एक हकीम ने उन्हें तोहफे के तौर पर इस घर को उन्हें दिया था। मिर्जा गालिब आगरा से आने के बाद इस हवेली में लगभग नौ साल रहे थे।
गालिब की रचनाओं का है संग्रह
Mirza Ghalib की हवेली में उनसे जुड़ी कई चीजों और रचनाओं को रखा गया है। जब आप इस हवेली में जाते हैं तो आपको गालिब के होने का अहसास होता है। यह हवेली सोमवार के दिन बंद रहती है, इसलिए आप वीकेंड पर यहां घूमने का प्लॉन कर सकते हैं। हवेली में जाने के लिए किसी तरह का कोई शुल्क नहीं है। जब आप यहां जाते हैं तो आपको मिर्जा की मूर्ति के अलावा उनकी संरचनाओं को भी करीब से देखने का मौका मिलता है।
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