महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे बनाम शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की जंग के लिए 27 सितंबर अहम दिन साबित हो सकता है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट राज्य के सियासी संकट से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करने जा रहा है।
बताया जा रहा था कि इन याचिकाओं पर आज न्यायालय सुनवाई कर सकता है। शिंदे कैंप के वकील नीरज किशन कौल की तरफ से मामले में तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया था।
चुनाव चिह्न पर छिड़ा है सियासी युद्ध
शिंदे कैंप की तरफ से ‘असली शिवसेना’ की मान्यता पाने के लिए आवेदन किया गया था। इस पर शीर्ष न्यायालय ने भारत निर्वाचन आयोग को पत्र भेजकर आवेदन पर फैसले नहीं करने के आदेश दिए थे। साथ ही कोर्ट ने मामले को 25 अगस्त को सुनवाई के लिए संवैधानिक बेंच के पास भेज दिया था।
याचिका पर याचिका और अयोग्यता की तलवार
सियासी विवाद को कानून तरीके से जीतने के लिए शिवसेना के दोनों गुटों की तरफ से कई याचिकाएं दायर की गईं। इस दौरान शिंदे कैंप ने भी 16 विधायकों के खिलाफ जारी अयोग्यता के नोटिस को भी चुनौती दी थी। हालांकि, एपेक्स कोर्ट ने 27 जून को शिंदे समूह को नोटिस का जवाब देने के लिए अंतरिम राहत दी थी।
महाराष्ट्र विधानसभा में स्पीकर ने शिंदे समूह के सदस्य को शिवसेना के व्हिप के रूप में मान्यता दे दी थी। बाद में ठाकरे कैंप की तरफ से इसे लेकर सवाल उठाए गए। ग्रुप का कहना था कि नए नियुक्त हुए स्पीकर के पास शिंदे की तरफ से नामित शख्स को व्हिप के रूप में मान्यता देने का अधिकार नहीं है, क्योंकि उद्धव अब भी शिवसेना के प्रमुख हैं।
अब दशहरा रैली पर विवाद जारी
हाल ही में शिंदे कैंप की तरफ से शिवाजी पार्क में दशहरा रैली की बात कही गई थी। इसपर शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट जाने की धमकी दे दी थी। दरअसल, साल 1966 से शिवसेना ही शिवाजी पार्क में रैली आयोजित कर रही है। लेकिन इसबार शिंदे समूह ने कार्यक्रम के आयोजन को लेकर बीएमसी से अनुमति मांगी है।
इसे भी पढ़े-महाराष्ट्र संकट पर बड़ा फैसला, अब 5 जजों की संविधान पीठ करेगी सुनवाई
हमारे फेसबुक पेज से जुड़ने के लिए


