खबर दुनिया भीमताल।ऑनलाइन खरीदारी का असर लोकल के व्यापरियो पर पड़ रहा है. खासकर छोटे किराना व्यापारी को काफी चुनौती मिल रही है. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे कि मैजिक और बिटकॉइन की शेयरिंग और गहरी छूट की नीति से पारंपरिक व्यापारी दबाव में हैं. और उनकी बड़ी संभावनाएं खतरे में हैं.
ऑनलाइन बिज़नेस के बढ़ते प्रभाव से स्थानीय व्यापार, विशेष रूप से छोटे किराना और स्ट्रेंथ एप्लायंस को काफी चुनौती मिली है
सरकार को इस मुद्दे पर चयन से विचार करना चाहिए.ऑनलाइन शॉपिंग पर जीएसटी एग्रीमेंट बढ़ाने जैसे कदमों से लोक व्यापार को संरक्षण मिल सकता है. स्थानीय उद्योगों को जगह मिल सकती है.वर्तमान जीएसटी की विभिन्न संरचना 0%, 5%, 12%, 18% और 28% के बीच हैं. यदि ऑनलाइन बिक्री पर जीएसटी बढ़ाया जाए तो यह ई-कॉमर्स के बड़े पैमाने पर छोटे बच्चों को स्टॉक में मदद करता है.सरकार ने ऑफ़लाइन विक्रयकर्ताओं के लिए सख्त नियम और टैक्स के उपाय भी शुरू कर दिए हैं.ताकि डिजिटल बिजनेस को सही तरीके से टैक्स दे और स्थानीय व्यापार को संरक्षण मिल सके. कुछ सुझावों में ऑनलाइन व्यापार के लिए एक प्रमाणित प्राधिकारी बनाना भी शामिल है. जो ई-कॉमर्स और स्थानीय उद्योग के बीच व्यवसायों को संतुष्ट करता है.



