भारत में मकर संक्रांति और बसंत पंचमी जैसे त्योहारों पर पतंग उड़ाना खुशी और उत्सव का प्रतीक माना जाता है। गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में पतंगबाजी प्रतियोगिताएं तक आयोजित होती हैं। लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान में यही परंपरा लोगों को सीधे जेल तक पहुंचा सकती है।
खतरनाक डोर बनी सबसे बड़ी वजह
पाकिस्तान में पतंग उड़ाने पर बैन की सबसे बड़ी वजह वहां इस्तेमाल होने वाली पतंग की डोर है। इन डोर पर कांच, केमिकल और मेटैलिक परत चढ़ी होती है। जब ये सड़कों पर लटक जाती हैं, तो मोटरसाइकिल सवारों और पैदल चलने वालों के लिए जानलेवा साबित होती हैं। कई मामलों में लोगों की गर्दन तक कट चुकी है।
बिजली लाइनों से टकराकर हादसे
मैटेलिक डोर अक्सर हाई वोल्टेज बिजली लाइनों के संपर्क में आ जाती है। इससे बड़े पैमाने पर बिजली गुल हो जाती है। कई दुखद घटनाओं में पतंग को निकालने की कोशिश में बच्चों को करंट लग चुका है, जिससे मौत तक हुई है।
जश्न में फायरिंग और हिंसा
पाकिस्तान में पतंगबाजी के त्योहारों के दौरान हवाई फायरिंग, खतरनाक बाइक स्टंट और सड़क हिंसा आम बात रही है। जश्न में की गई फायरिंग से कई निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है। इसी वजह से प्रशासन ने इसे कानून-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना।
धार्मिक आपत्तियां भी आईं सामने
कुछ धार्मिक विद्वानों ने पतंग उड़ाने को गैर-इस्लामी बताते हुए फतवे जारी किए हैं। उनका कहना है कि यह फिजूलखर्ची, जोखिम भरे व्यवहार और आत्म-नुकसान को बढ़ावा देता है।
कानून कितना सख्त है?
पंजाब रेगुलेशन ऑफ काइट फ्लाइंग एक्ट के तहत पतंग उड़ाते पकड़े जाने पर 3 से 5 साल की जेल और 20 से 50 लाख पाकिस्तानी रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। यह अपराध अब गैर-जमानती है। अगर नाबालिग पतंग उड़ाता है तो माता-पिता पर ₹50,000 से ₹1,00,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
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