हल्द्वानी खबर संसार.बचपन का संघर्ष, प्रबल इच्छा शक्ति की सशक्त झलक दिखाता, एकल नाटक सूरज ने छात्रों में जगाया संवेदना का भाव,बच्चों में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए *दि आनंदा एकेडमी, डहरिया,* में एकल नाटक *सूरज* का आयोजन किया गया। जिसका निर्देशन *लक्की जी गुप्ता* द्वारा तथा अभिनय *फुलेंद्र पंडित* जी द्वारा किया गया। यह कहानी सूरज नाम के एक बच्चे के इर्द-गिर्द घूमती है जिसमें वह गरीब परिवार से संबंध रखता है तथा उसके माता और पिता की मृत्यु हो जाने के बाद वह सड़क से प्लास्टिक की बोतले बीनकर अपना गुजारा करता है। एक दिन कुछ लोग नशीली दवाई खिलाकर उसका अपहरण कर लेते हैं तथा ईंट के भट्टे में उससे 5 साल तक काम करवाया जाता है। वह बार-बार वहाँ से भागने का प्रयास करता है
अंत में सफल हो जाता है। एक भले आदमी ने उसकी सहायता करनी चाही किंतु वह सहायता लेने के लिए सहमत नहीं होता ,अंत में वह व्यक्ति सूरज को मना कर अपने घर ले जाता है उसकी शिक्षा – दीक्षा तथा पालन – पोषण करता है और उसके साथ-साथ उसे रंगमंच के गुर सिखाता है । बड़ा होने पर वह एक अच्छा रंगकर्मी बन जाता है अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से वह सभी का मन मोह लेता है। प्रस्तुति ने छात्रों को अत्यंत भाव में विभोर कर दिया। नाटक “सूरज” की देश के विभिन्न राज्यों में 78 से 79 प्रस्तुतियाँ की जा चुकी है । इस अवसर पर विद्यालय के निर्देशक एवं प्रबंधक श्री *भूपेंद्र सिंह बिष्ट, निर्देशिका श्रीमती दीक्षा बिष्ट, प्रधानाचार्या श्रीमती माया बिष्ट ,उप प्रधानाचार्य श्रीमती सुष्मिता बगडवाल* एवं सभी शिक्षकगण भी उपस्थित रहे। श्री भूपेंद्र बिष्ट जी ने कहा कि नाटक मंचन छात्रों में संवेदनशीलता तथा भावनात्मक मजबूती लाता है।
निर्देशिका श्रीमती दीक्षा बिष्ट जी ने कहा कि नाटक मंचन के मध्यम से अधिगम में सरलता आती है तथा छात्रों का चहुमुखी विकास संभव है। प्रधानाचार्या महोदया ने छात्रों को नाटक से मिली सीख – ” कठिन परिस्थिति में सकारात्मक सोच रखने से जीवन में सफलता अवश्य मिलती है।” का वस्तविक जीवन में पालन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच तथा संघर्ष से जीवन की कठिन परिस्थितियों को भी बदला जा सकता है।






