बृहस्पतिवार को भारतीय रुपया रिकॉर्ड गिरावट के साथ 95.34 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। गुरुवार के कारोबारी सत्र में। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में। पश्चिम एशिया तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण। निवेशक, आम उपभोक्ता और बाजार। शेयर बाजार में बिकवाली और विदेशी निवेश निकासी से दबाव बढ़ा।
रुपये में ऐतिहासिक गिरावट
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.01 पर खुला और गिरकर 95.34 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया।
दोपहर में यह 95.25 पर कारोबार करता दिखा।
- बुधवार को बंद हुआ था: 94.88
- एक दिन में भारी गिरावट दर्ज
शेयर बाजार में भारी दबाव
घरेलू बाजार में भी गिरावट ने स्थिति और खराब की:
- सेंसेक्स: 687.75 अंक गिरकर 76,808.61
- निफ्टी: 228.60 अंक टूटकर 23,949.05
विदेशी निवेशकों (FII) ने 2,468.42 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बिकवाली बढ़ी।
कच्चे तेल की कीमतों का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 3.46% बढ़कर 122.11 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।
तेल की कीमतों में उछाल ने रुपये पर दबाव और बढ़ाया। छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर इंडेक्स मामूली गिरावट के साथ 98.79 पर रहा, लेकिन इसका रुपये पर ज्यादा राहतकारी असर नहीं दिखा।
आम आदमी पर क्या असर?
रुपये की कमजोरी और महंगे तेल का सीधा असर जनता पर पड़ता है:
- आयातित सामान महंगे होंगे (जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स)
- ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ेगा
- महंगाई बढ़ने का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता, बाजार में अनिश्चितता बनी रह सकती है।
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