कई निवेशक मानते हैं कि एसआईपी (Systematic Investment Plan) म्यूचुअल फंड में निवेश करने का सबसे सुरक्षित तरीका है। यह धारणा लंबे समय से बनी हुई है कि नियमित निवेश से लंबे समय में अच्छा रिटर्न मिलता है। लेकिन अब चार्टर्ड अकाउंटेंट श्रुति इनानी (Shruti Inani) ने एक अलग तस्वीर सामने रखी है।
उन्होंने लिंक्डइन पर एक पोस्ट में बताया कि एसआईपी हर बार फायदेमंद साबित नहीं होती। उन्होंने सिंगापुर के शोधकर्ता राजन राजू की एक स्टडी का हवाला दिया, जिसमें साल 2005 से 2025 के बीच पाँच एनएसई इंडेक्स के एसआईपी प्रदर्शन का विश्लेषण किया गया है।
स्टडी के नतीजे: हर SIP जीत की गारंटी नहीं
श्रुति इनानी ने बताया कि इस स्टडी ने म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की उस धारणा को चुनौती दी है जिसमें कहा जाता है कि SIP से कम जोखिम में लंबी अवधि में धन बनाया जा सकता है।
नतीजों के अनुसार,
- 3 साल के निवेश में SIP के डूबने की संभावना 6% से अधिक रही, जबकि एकमुश्त निवेश में यह 5% से कम थी।
- 5 साल के बाद भी SIP में 2-3% नुकसान का जोखिम बना रहा, जबकि एकमुश्त निवेश में यह शून्य था।
निवेशकों को हो सकता है नुकसान
श्रुति ने बताया कि जब एसआईपी में नुकसान होता है, तो निवेशक औसतन अपने निवेश का 10% तक खो देते हैं।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (Kotak Institutional Equities) के आंकड़ों के अनुसार, 2021 से अब तक SIP में लगाए गए 40% निवेश पर कोई मुनाफा नहीं हुआ है।
स्मॉल-कैप एसआईपी को भले ही तेजी से बढ़ते निवेश विकल्प के रूप में प्रचारित किया गया हो — जो 2019 से 2024 के बीच 6.5 गुना बढ़े — लेकिन इन योजनाओं में 5 साल के निवेश पर 14% नुकसान का जोखिम भी बना हुआ है।
नए निवेशकों के लिए सबक
यह रिपोर्ट उन नए निवेशकों के लिए चेतावनी है जो बिना रिसर्च के सिर्फ रिटर्न के लालच में SIP शुरू कर देते हैं। निवेशकों को अब केवल “लॉन्ग टर्म फायदेमंद” कहकर किसी भी रणनीति को अपनाने से पहले आंकड़ों को समझना जरूरी है।
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