भारत में करीब एक दशक बाद नए बैंकिंग लाइसेंस जारी होने की उम्मीद जगी है। वित्त मंत्रालय और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) दीर्घकालिक विकास को गति देने और अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिए बैंकिंग क्षेत्र के विस्तार पर मंथन कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह चर्चा फिलहाल शुरुआती चरण में है और अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।
बड़ी कंपनियों और एनबीएफसी के लिए नई राह?
- ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, जिन विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, उनमें शामिल हैं:
- बड़ी कंपनियों को शेयरधारिता प्रतिबंध के साथ बैंकिंग लाइसेंस की अनुमति
- गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) को पूर्ण-सेवा बैंक बनने के लिए प्रोत्साहन
- सरकारी बैंकों में विदेशी निवेशकों के लिए हिस्सेदारी बढ़ाना आसान करना
- हालांकि, वित्त मंत्रालय और आरबीआई ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। बाजार ने इस खबर पर सकारात्मक रुख दिखाया और निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 0.5% की बढ़त के साथ बंद हुआ।
नीतियों पर पुनर्विचार संभव
भारत में आखिरी बार 2014 में नए बैंकिंग लाइसेंस जारी किए गए थे। 2016 में बड़ी औद्योगिक कंपनियों को बैंकिंग में प्रवेश से रोकने की नीति अपनाई गई थी। अब इस पर भी पुनर्विचार हो सकता है। अधिकारी छोटे बैंकों के विलय और दक्षिण भारत के एनबीएफसी को प्रोत्साहन जैसे विकल्प भी देख रहे हैं।
वैश्विक रैंकिंग में पिछड़ता भारत
फिलहाल केवल भारतीय स्टेट बैंक और एचडीएफसी बैंक ही दुनिया के शीर्ष 100 बैंकों में शामिल हैं। चीन और अमेरिका के बैंक शीर्ष 10 में जगह बनाए हुए हैं। वर्तमान में सरकारी बैंकों में विदेशी निवेश की सीमा 20% है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसे बढ़ाने की योजना पर भी चर्चा हो रही है।
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