खबर संसार। समाज को शास्त्र और शस्त्र का अनूठा मंत्र देने वाले भगवान परशुराम ऋषियों के ओज और क्षत्रियो के तेज दोनों का अद्भुत संगम आने जाते हैं।
जी हा आज परशुराम जयंती है, उनको नमन।भगवान परशुराम के पिता ब्राह्मण कुल के तो माता क्षत्रिय कुल की थी।
समाज को शास्त्र और शस्त्र का अनूठा मंत्र देने वाले भगवान परशुराम पर नमन
माता और पिता दोनो ही विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। भगवान परशुराम के पिता जमदग्नि को अग्नि पर नियंत्रण पाने के सिद्धि थी तो माता रेणुका को जल पर नियंत्रण पाने का वरदान महर्षि अगस्त्य ने दिया था। माता पिता के इन दिव्य गुणों के साथ जन्मे भगवान परशुराम जी को बचपन में राम के नाम से पुकारा जाता था। कलांतरण में महादेव से परशु प्राप्त होने के बाद उनका नाम परशुराम हो गया।
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भगवान परशुराम जी महाराज किसी धर्म जाति वर्ण या वर्ग विशेष के आराध्य ही नहीं बल्कि वे समस्त मानव मात्र के आराध्य हैं. इन्होंने सनातन संस्कृत के वैभव को बढ़ाने का कार्य किया है। परशुराम जी दिव्यास्त्र चलाने में महाभारत हासिल थी। भीष्म,द्रोणाचार्य और कर्ण को भगवान परशुराम ने ही युद्धविधा का महारथी बनाया था।
















