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ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का बड़ा दांव, आखिर क्या है अमेरिका का प्लान?

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और डेनमार्क के बीच विवाद कई वर्षों से जारी है। 2019 में डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड में रुचि सामने आने के बाद यह मुद्दा चर्चा में आया। 2024 और 2025 में तनाव बढ़ा, जबकि 2026 में सैन्य मौजूदगी और सुरक्षा समझौते को लेकर घटनाक्रम आगे बढ़ा।

ग्रीनलैंड को लेकर 2019 में शुरू हुई कहानी

नाटो के सहयोगी डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दिलचस्पी पहली बार 2019 में सार्वजनिक हुई। अगस्त 2019 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड खरीदने में रुचि दिखाई, हालांकि उन्होंने इसे तत्काल प्राथमिकता नहीं बताया। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने इसे ‘‘बेतुकी चर्चा’’ कहकर खारिज कर दिया। इसके बाद ट्रंप ने डेनमार्क यात्रा रद्द कर दी।

2024-25 में फिर तेज हुआ ग्रीनलैंड विवाद

22 दिसंबर, 2024 को ट्रंप ने फिर कहा कि ग्रीनलैंड का स्वामित्व और नियंत्रण अमेरिका के लिए बेहद जरूरी है। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री म्यूट बोरोप एगेडे ने कहा कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है। 7 जनवरी, 2025 को ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर ने ग्रीनलैंड का दौरा किया और ट्रंप ने सैन्य बल के इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं किया।

मार्च 2025 में ग्रीनलैंड में संसद चुनाव हुए और जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन की डेमोक्राटिट पार्टी को जीत मिली। इसके बाद संसद की सभी पांच पार्टियों ने अमेरिकी नियंत्रण का विरोध किया। 28 मार्च को अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने पिटुफिक अंतरिक्ष अड्डे का दौरा किया। अगले दिन डेनमार्क के विदेश मंत्री ने अमेरिकी आलोचना पर आपत्ति जताई।

2025 के अंत में फिर बढ़ा तनाव

27 अगस्त, 2025 को डेनमार्क के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के शीर्ष राजनयिक को तलब किया। यह कदम एक डेनिश प्रसारक की उस रिपोर्ट के बाद उठाया गया, जिसमें ट्रंप से जुड़े कम से कम तीन लोगों पर ग्रीनलैंड में गुप्त प्रभाव अभियान चलाने का आरोप लगाया गया था।

21 दिसंबर को ट्रंप ने लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री को ग्रीनलैंड के लिए अमेरिकी विशेष दूत नियुक्त किया। 22 दिसंबर को डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा नहीं करेगा।

2026 में सैन्य विकल्प और शुल्क की धमकी

4 जनवरी, 2026 को निकोलस मादुरो को अमेरिका द्वारा हटाए जाने के बाद ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की चर्चा फिर तेज हुई। 5 जनवरी को मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा कि अमेरिकी सैन्य कब्जा नाटो के अंत के समान होगा। 6 जनवरी को यूरोप के प्रमुख नेताओं ने ग्रीनलैंड की संप्रभुता का समर्थन किया।

8 जनवरी को ट्रंप ने पूरे ग्रीनलैंड पर अधिकार की इच्छा जताई। 13 जनवरी को नीलसन ने कहा कि अमेरिका और डेनमार्क में से किसी एक को चुनना पड़ा तो ग्रीनलैंड ‘‘अभी डेनमार्क को चुनेगा।’’ 14 जनवरी को दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई और कार्य समूह बनाने पर सहमति बनी।

16 जनवरी को ट्रंप ने विरोध करने वाले देशों पर शुल्क लगाने की बात कही और 17 जनवरी को आठ यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की। 21 जनवरी को प्रस्तावित शुल्क वापस ले लिए गए। 28 जनवरी को अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच तकनीकी बातचीत शुरू हुई।

सितंबर 2026 में समझौते से आया नया मोड़

21 फरवरी को ट्रंप ने ग्रीनलैंड में अस्पताल जहाज भेजने की बात कही, जिसे नीलसन ने ‘‘नहीं धन्यवाद’’ कहते हुए खारिज कर दिया। 7 जुलाई को ट्रंप ने फिर कहा कि ग्रीनलैंड डेनमार्क के बजाय अमेरिका के नियंत्रण में होना चाहिए। फ्रेडरिक्सन ने दोहराया कि ग्रीनलैंड ‘‘बिक्री के लिए नहीं है।’’

18 सितंबर, 2026 को ट्रंप ने ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी मजबूत करने के लिए समझौते की घोषणा की। डेनमार्क के अधिकारियों ने सतर्क आशावाद जताया। फ्रेडरिक्सन ने कहा कि प्रस्तावित समझौता डेनमार्क की संप्रभुता और ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को मान्यता देता है।

10 प्वाइंट में ग्रीनलैंड विवाद

  1. अगस्त 2019 में ट्रंप ने ग्रीनलैंड खरीदने में रुचि दिखाई।
  2. मेटे फ्रेडरिक्सन ने इसे ‘‘बेतुकी चर्चा’’ कहा।
  3. 22 दिसंबर, 2024 को ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण को जरूरी बताया।
  4. 7 जनवरी, 2025 को डोनाल्ड ट्रंप जूनियर ने ग्रीनलैंड का दौरा किया।
  5. मार्च 2025 में जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन की पार्टी को चुनाव में जीत मिली।
  6. 28 मार्च, 2025 को जे डी वेंस ने पिटुफिक अंतरिक्ष अड्डे का दौरा किया।
  7. जनवरी 2026 में ट्रंप ने सैन्य विकल्प और शुल्क लगाने की बातें कहीं।
  8. 28 जनवरी, 2026 को आर्कटिक सुरक्षा पर तकनीकी बातचीत शुरू हुई।
  9. 7 जुलाई, 2026 को ट्रंप ने फिर अमेरिकी नियंत्रण की बात कही।
  10. 18 सितंबर, 2026 को अमेरिकी सैन्य मौजूदगी मजबूत करने के समझौते की घोषणा हुई।

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